अब ना बहुजन धोखा खाओ,
देश में अपना शासन लाओ।
बहुत सह लिया अत्याचार,
अब मिलकर के सबक सिखाओ।।
जुल्म सहते सहते सदिया गुजरी,
अब अपने हक अधिकार बचाओ।
वर्षों से तुमको छला गया,
अब ना किसी के बहकावे में आओ।
देखो जानो और पहचानो,
जाति वर्ण को तुम ना मानो।
हम भारत के है मूलनिवासी,
खुद भी समझो औरों को भी समझाओ।
सदियों से तुमको वंचित रखा,
टुकड़ों टुकड़ों में है बांटा।
उठो जागो और एक हो जाओ,
अब मिलकर अपनी सरकार बनाओ।
टुकड़ों में जो बटें रहोगे,
दुश्मनों पर रोज पिटते रहोगे।
मां बहनों की लाज बचाओ,
सोती अपनी कौम जगाओ।
एक साथ सब फिर हो जाओ,
देश में अपना शासन लाओ!
अब ना बहुजन धोखा खाओ,
देश में अपना शासन लाओ!!!
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बहुजन चिंतक/ युवा कवि ~ सोनू निगम सुन्दर

