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जब हम भारतीय संविधान के बारे में बात करते हैं, तो डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनके पीछे भी कुछ लोग थे जिन्होंने उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित किया? टी. टी. कृष्णमचारी ने 5 नवंबर 1948 को संविधान समिति में एक ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने डॉ. आंबेडकर के योगदान की सराहना की थी।
टी. टी. कृष्णमचारी कौन थे?

टी. टी. कृष्णमचारी भारतीय राजनीति में एक प्रमुख व्यक्तित्व थे। उन्होंने विभाजन के बाद भारतीय संविधान समिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत देश के वित्त मंत्री भी रहे हैं
उनका ऐतिहासिक भाषण

टी. टी. कृष्णमचारी- ने संविधान समिति में 5 नवंबर 1948 को जो भाषण उन्होंने कहा “सदन को शायद यह मालूम हुआ होगा कि, आपका चुने हुए 7 सदस्यों में से एक ने इस्तीफा दे दिया उसकी जगह रिक्त ही रही. यह सदस्य की मृत्यु हुई, उसकी जगह भी रिक्ति रही। एक सदस्य अमेरिका गए उनकी, जगह भी वैसे ही खाली रही। चौथ सदस्य रिस्तेदारों संबंधी कामकाजों में व्यस्त रहे, इसलिए वे सदस्य होकर भी ना के बराबर ही थे। दो-एक सदस्य दिल्ली से दूरी पर थे, उनका स्वास्थ्य बिगड़ने से वे भी उपस्थित नहीं रह सके। आखिर यह हुआ कि संविधान बनाने का सारा बोझ अकेले डॉ आंबेडकर पर ही आन पड़ा।अनेक कठिनाइयों से भी मार्ग निकालकर यह कार्य पूर्ण किया जिसके लिए हम उनके हमेशा ऋणी रहेंगे ।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
टी. टी. कृष्णमचारी के भाषण से हमें यह सिखने को मिलता है कि भारतीय संविधान का निर्माण एक व्यक्ति के द्वारा नहीं हुआ, बल्कि इसमें कई लोगों का योगदान था। लेकिन जब बाकी सब विफल रहे, तब डॉ. आंबेडकर ने अकेले ही इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा किया।
निष्कर्ष
टी. टी. कृष्णमचारी के भाषण ने हमें यह दर्शाया कि भारतीय संविधान का निर्माण एक सांविदानिक उपहार नहीं है, बल्कि यह एक संयुक्त प्रयास था। उनके भाषण में डॉ. आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए उन्हें सलाम करना चाहिए।
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