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Reading: भीमराव अंबेडकर की जीवनी हिंदी में (यदि बाबा ना होते)
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Tathagat LIVE > प्रत्यक्षदर्शी लिखते हैं > भदंत आनंद कौसल्यायन > भीमराव अंबेडकर की जीवनी हिंदी में (यदि बाबा ना होते)
प्रत्यक्षदर्शी लिखते हैंभदंत आनंद कौसल्यायनडॉ आंबेडकर

भीमराव अंबेडकर की जीवनी हिंदी में (यदि बाबा ना होते)

Shaktimaan
Last updated: 2023/10/31 at 6:05 PM
Shaktimaan 11 Min Read
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📖 डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन अपनी किताब “यदि बाबा ना होते” ( भीमराव अंबेडकर )

Contents
महाराष्ट्र को महाराष्ट्र क्यों कहते हैं why is maharashtra called maharashtraभीमराव अंबेडकर के पिता का नाम  What is the name of Bhimrao Ambedkar’s father?भीमराव अंबेडकर के दादा जी का क्या नाम था ? What was the name of Bhimrao Ambedkar’s grandfather?दलितों के नाम का मजाक उड़ाया जाता था People used to make fun of the names of Dalits.भीमराव अंबेडकर के दादा जी अंग्रेजी सेना के फौजी Bhimrao Ambedkar’s grandfather was a soldier in the British army.भीमराव अंबेडकर के पिता भी फ़ौज में भर्ती  Bhimrao Ambedkar’s father was also enlisted in the army.भीमराव अंबेडकर के माता-पिता का विवाह The marriage of Bhimrao Ambedkar’s parents.भीमराव अंबेडकर का जन्म कहां हुआ ? Where was Bhimrao Ambedkar born?भीमराव अंबेडकर के पिता धार्मिक थे Bhimrao Ambedkar’s father was religious.

महाराष्ट्र को महाराष्ट्र क्यों कहते हैं
why is maharashtra called maharashtra

अपने देश में जो कुल 16 राज्य (पुराने समय में) थे, उनमें से जनसंख्या के हिसाब से पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है, दूसरे स्थान पर बिहार है और तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या सबसे अधिक है, 7 करोड़ 37 लाख से ऊपर, जबकि महाराष्ट्र की जनसंख्या भी कुछ कम नहीं है, लगभग 4 करोड़।

महाराष्ट्र को महाराष्ट्र क्यों कहते हैं, इस विषय पर विद्वानों में अलग-अलग विचार हैं। कुछ मानते हैं कि पुराने समय में इस प्रदेश का कोई अन्य नाम होता था। बाद में, या तो ‘महार‘ और ‘रट्ट‘ नामक जातियों के निवास के कारण इसे महाराष्ट्र कहा गया, या फिर इसे ‘महारों का राष्ट्र’ मानकर महाराष्ट्र कहलाया।

अपने देश में, जब उन लोगों के हाथ में सत्ता आई जिन्हें बौद्ध धर्म पसंद नहीं आया, उन्होंने वे जातियाँ जो बौद्ध धर्म को मानती थी, उन्हें सामाजिक दृष्टिकोण से ‘अछूत’ मान दिया। महार जाति भी उन जातियों में से एक थी। प्रसिद्ध लेखक वैडन पावल के अनुसार, एक समय था जब महाराष्ट्र में महार जातियों की प्रमुखता थी। वे अपने नियम, कानून, धर्म और रीति-रिवाज अपनाते थे।

जिस जाति ने वैभवशाली दिन देखे थे, समय के साथ उसी जाति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र के महार समुदाय की स्थिति खराब हो गई थी, लेकिन कोकण प्रदेश में रह रहे महारों की स्थिति और भी खराब हुई। इसी कोकण प्रदेश के एक ‘महार’ परिवार में डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था।

भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम 
What is the name of Bhimrao Ambedkar’s father?

कोकण प्रदेश के रत्नागिरी जिले में ‘अंबावडे’ नामक एक छोटा गांव है। इस गांव के चारों ओर छोटी-छोटी पहाड़ियां हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर के पिता उसी गांव के थे और उनका नाम रामजीराव सकपाल था।

भीमराव अंबेडकर के दादा जी का क्या नाम था ?
What was the name of Bhimrao Ambedkar’s grandfather?

जब मुगल साम्राज्य प्रचलित था और महाराष्ट्र में पेशवाओं की शासन प्रणाली चल रही थी, उसी समय से मालोजीराव के पूर्वज ‘फौजी’ नौकरी में थे। जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर शासन किया, तो मालोजी के पूर्वज कंपनी में नौकरी करते थे। मालोजीराव (मालोजी राव सकपाल) जब जवान हुए, तो उन्होंने भी कंपनी में ही नौकरी अपनाई।

What was the name of Bhimrao Ambedkar's grandfather?

दलितों के नाम का मजाक उड़ाया जाता था
People used to make fun of the names of Dalits.

उस समय, अगर किसी ‘महार’ का नाम किसी देवता या वीर पुरुष पर रखा जाता था, तो उसका नाम सरकारी दस्तावेजों में बिगड़ा हुआ रूप में दर्ज होता था। इसके अलावा, उसके नाम के साथ ‘नाक’ शब्द जोड़ दिया जाता था। यह ‘नाक’ शब्द ‘नाग’ का ही विकृत रूप प्रतित होता है। मालोजीराव का नाम सरकारी दस्तावेजों में ‘मालनाक‘ के रूप में दर्ज होता था। उनका कुलनाम ‘सकपाल’ भी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज था।

भीमराव अंबेडकर के दादा जी अंग्रेजी सेना के फौजी
Bhimrao Ambedkar’s grandfather was a soldier in the British army.

मुगल, मराठे और पेशवाओं की फौज में रहने वाले लोग अधिकतर अपने गांव से संबंध बनाए रखते थे। हालांकि, कंपनी के सिपाहियों को बहुत दूर-दूर तक जाना पड़ता था, इसलिए उनके लिए अपने गांव से संबंध बनाए रखना कठिन होता था। इसी कारण, मालोजीराव सकपाल का भी अपने गांव अंबावडे से संबंध कमजोर हो गया था।

भीमराव अंबेडकर के पिता भी फ़ौज में भर्ती 
Bhimrao Ambedkar’s father was also enlisted in the army.

मालोजीराव के चार बच्चे थे – तीन लड़के और एक लड़की। तीन भाइयों की एक ही बहन का नाम मीराबाई था। बेचारी मीराबाई जन्म से ही ‘पंगु’ थी। उसके बाद रामजी का जन्म हुआ। वही डॉ. भीमराव अंबेडकर के पिता थे। उनका जन्म लगभग 1848 में हुआ था। तीनों भाई जब बड़े हुए, तो वे फौज में भर्ती हो गए। क्योंकि उनकी टुकड़ी अलग-अलग जगहों पर स्थित थी, इसलिए वे आपस में मिलते नहीं थे। वे पत्राचार के माध्यम से ही संपर्क में रहते थे और कभी-कभी छुट्टियों पर घर आकर कुछ समय बिताते थे। 1892 के बाद से ‘महार’ जाति के लोगों की सेना में भर्ती को रोक दिया गया था।

रामजी के पिता मालोजीराव ने सेना में हवलदार के पद तक पहुंचने की सफलता प्राप्त की थी। रामजी खुद सेना में पहले ‘रंगरूट’ के रूप में भर्ती हुए थे, और बाद में उन्होंने सूबेदार की पद की उचाईयों तक पहुंचने की तरक्की की। रामजी की बड़ी बहन, मीराबाई, पंगु होने के कारण उसके पास ही रहती थी।

जो ‘महार’ सेना में नौकरी करते थे, उनमें दो प्रमुख आदतें होती थीं। उनमें से एक तो शराब पीने की और दूसरी ब्रह्मज्ञान प्राप्ति की थी। मालोजीराव को ब्रह्मज्ञान प्राप्ति की ओर आकर्षित होने की आदत थी।

भीमराव अंबेडकर के माता-पिता का विवाह
The marriage of Bhimrao Ambedkar’s parents.

19 वर्ष की आयु में रामजी का विवाह 13 वर्ष की भीमाबाई से हुआ था। भीमाबाई घर गृहस्ती के मामले में किसी की भी बात मानने वाली नहीं थी। उन्हें जो कुछ ठीक जचता वही करने वाली थी।

The marriage of Bhimrao Ambedkar's parents.

भीमराव अंबेडकर का जन्म कहां हुआ ?
Where was Bhimrao Ambedkar born?

सन 1891 में, MHOW (Military Headquarters of War) में रामजी और भीमाबाई को 14 संतानें हुईं। हमारे चरित्र-नायक ‘भीम’ उनकी अंतिम संतान थे। वे मजाक में कभी-कभी कहते थे कि वे अपने माता-पिता के चौधवें रत्न हैं। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था, जो एक पूर्णिमा का दिन था।

भीमराव अंबेडकर के पिता धार्मिक थे
Bhimrao Ambedkar’s father was religious.

अपने पिता मालोजीराव की तरह, रामजी भी धार्मिक प्रवृत्ति वाले थे। पहले, वह रामानंद के अनुयायी थे, लेकिन सेवा से छुट्टी पाने के बाद, वह कबीरपंथी बन गए। वह कभी शराब नहीं पीते थे और अब उन्होंने मांस खाना भी छोड़ दिया था। वह प्रतिदिन नियमित रूप से पूजा-पाठ करते थे, और परिवार के सभी सदस्यों को उस पूजा-पाठ में शामिल होना होता था। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने बड़े होने पर अपने बचपन के इस अनुभव को कभी नहीं भुलाया। वह कहते थे, “हमारा परिवार गरीब था, लेकिन उसका माहौल शिक्षित परिवार के समान था। हमें पढ़ाई में रुचि थी, और हमारे पिता हमारी उन्नति की चिंता करते थे। वह हमें भोजन करने से पहले पूजा स्थल पर भजन और प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करते थे।“

मालूजी राव की मृत्यु के बाद, मीराबाई परिवार में सबसे बड़ी थी। डॉ. अंबेडकर की माता, भीमाबाई, पंगु होने के बावजूद मीराबाई की सेवा का खास ख्याल रखती थी। मीराबाई शांत, गंभीर स्वभाव की और समझदार स्त्री थी। परिवार के सभी सदस्य इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सतत प्रयासरत रहते थे कि उसे किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो। मीराबाई और डॉ. भीमराव की माता भीमाबाई दोनों ही ‘भीम’ को प्यार से “भिवा” कहकर पुकारती थी। आगे की कहानी जानने के लिए,
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