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Reading: डॉ आंबेडकर के अनदेखे ओरिजिनल फोटो
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Tathagat LIVE > प्रत्यक्षदर्शी लिखते हैं > डॉ आंबेडकर > डॉ आंबेडकर के अनदेखे ओरिजिनल फोटो
डॉ आंबेडकरप्रत्यक्षदर्शी लिखते हैं

डॉ आंबेडकर के अनदेखे ओरिजिनल फोटो

IronMan
Last updated: 2023/11/26 at 11:52 AM
IronMan 8 Min Read
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15 अप्रैल 1948 को डॉ आंबेडकर ने डॉ शारदा कबीर से रजिस्ट्री पद्धति से दिल्ली में विवाह किया. शारदा कबीर ने 1938 में मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बीएस. किया था. विवाहोपरांत उनका नाम सविता रखा गया
30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्मा गांधी जी की नाथूराम गोडसे ने हत्या कर दी और सारा देश हिल गया. डॉ आंबेडकर बिड़ला हाउस की तरफ दौड़ पड़े वहां पर कांग्रेसी नेता शंकरराव देव से बातचीत करते हुए डॉ आंबेडकर
Photograph taken on the steps of Dr. Ambedkar's Tilak Bridge in Dadar.
सार्वजनिक गणेश उत्सव में अस्पृश्यों को पूजा करने का अधिकार मिले, इस उद्देश्य से मुंबई के दादर सार्वजनिक गणेश उत्सव मंडल ( खांड के बिल्डिंग ) से डॉ आंबेडकर की सलाह के अनुसार समाज सुधारक युवक मंडल व समाज क्षमता संग नामक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने लिखित मांग की। इसके पहले इन कार्यकर्ताओं ने चंदा भर कर गणेश उत्सव मंडल की संस्था प्राप्त की थी। इस आधार पर पूजा का हक प्राप्त करने के लिए 24 सितंबर 1928 को डॉ आंबेडकर के नेतृत्व में रायबहादुर सी के बोले, प्रबोधनकार ठाकरे, केलस्कर गुरुजी, भास्करराव कर्देकर तथा अन्य लोग गणेश उत्सव के स्थान पर एकत्रित हुए। आखिरकार आयोजकों की विनती पर डॉ आंबेडकर आए और उन्होंने चर्चा कर अस्पृश्यों को हिंदुओं के साथ पूजा करने का अधिकार देने के लिए उन्हें बाधित किया। इस आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ डॉ आंबेडकर के दादर के तिलक पुल की सीढ़ियों पर खींचा गया छायाचित्र

29 जुलाई 1942 को डॉ आंबेडकर द्वारा श्रम मंत्री के पद की जिम्मेदारी स्वीकार करते ही 7 व 8 अगस्त 1942 को उनकी अध्यक्षता में मलिक मजदूर व सरकार के प्रतिनिधियों की त्रिपक्षीय परिषद दिल्ली में आयोजित की गई . वी. वी.गिरी, ना. म. जोशी, जमनादास मेहता जैसे मजदूर नेताओं ने इस परिषद में भाग लिया था . इस परिषद में डॉ आंबेडकर नीड ऑफ यूनिफोर्मिटी इन लेबर लेजिसलेशन विषय पर भाषण दे रहे हैं और उनकी दाईं तरफ जमनादास मेहता ना. म. जोशी द्वारकानाथ प्रधान इत्यादि बैठे हुए हैं

29 अगस्त 1947 को संविधान सभा में संविधान का मसौदा जाचने के लिए 7 सदस्यों की एक मसौदा समिति बनाई . इस समिति ने 30 अगस्त 1947 को हुई अपनी पहली बैठक में डॉ अंबेडकर को एक मत से अध्यक्ष चुना छायाचित्र में डॉ आंबेडकर के साथ (बैठे हुए बाई तरफ से) एन माधवराव, सय्यद सादुल्ला, अल्लादी कृषणस्वामी अय्यर (मसौदा समिति के सदस्य) सर बी. एन. राव (संविधान सलाहकार) (पीछे खड़े बाएं तरफ से) एस. एन. मुखर्जी, युगल किशोर खन्ना और केवल कृष्णन (कार्यालीन अधिकारी)
नासिक में अपने कार्यकर्ताओं के साथ डॉ आंबेडकर 18 अगस्त1986 (बायीं ओर से बैठे हुए) एच.के घोड, बपुसाहब उर्फ बड़ेदादा गायकवाड, दादा साहब गायकवाड, एम.के जाधव (बीच की कतार) के आर दाणी,  एम. आर पवार, डी. एस शेजवल, बि.जी बर्वे, महादेवराव कोगले, डी. एन गांगुर्दे, टी.आर पवार, एस.एस  बालेराम, एस.पी केदार (ऊपरी कतार ) एस.एस भालेराव, जे.जी जाधव ए जी बछाव, पी.एम डाँगले, ए।आर वाघ, आर.आर हरीनामे, बी.एम भोले, आर.के जाधव. इस छायाचित्र के संयोजक महादेव राव कोलगे थे.


श्रममंत्री के रूप में 1 दिसंबर1943 को डॉ आंबेडकर धनबाद बिहार के कोयला खदान मजदूरों की कॉलोनी में गए तब खींचा गया छायाचित्र। इस दौरान उन्होंने खदान मजदूर की बस्तियों का दौरा कर उनकी समस्याएं सुनी श्रममंत्री के रूप में उन्होंने मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन, कानून सुविधा, काम के घंटे, प्रस्तुति के लिए स्त्रियों को वेतन सहित छुट्टी, सेवायोजन, काम के स्थान पर स्त्रियों के लिए अलग से प्रसाधन गृह, सुरक्षा योजनाएं, मजदूर कॉलोनी, मजदूरों के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा, अनिवार्य बीमा, इत्यादि अनेक योजनाएं बनाई व उन्हें अमल में लाने की जी तोड़ कोशिश की

पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी के संपादक अध्यक्ष डॉ आंबेडकर सिद्धार्थ महाविद्यालय आनंद भवन फोर्ट मुंबई के अपने कार्यालय में (1946)

मुंबई में 1 अक्टूबर 1918 को डॉ आंबेडकर की महाविद्यालय में अर्थशास्त्र के अस्थाई प्राध्यापक के रूप में हर माह ४५० रुपए वेतन पर नियुक्ति हुई 10 नवंबर 1919 से उन्होंने महाविद्यालय में नौकरी शुरू की . महाविद्यालय के प्राचार्य पार्सि अन्सटे और अन्य सहयोगी प्राध्यापकों के साथ डॉ आंबेडकर (1918 – 1919) प्राध्यापक की नौकरी करते हुए ही डॉ आंबेडकर ने 27 जनवरी को मुंबई मके साउथबरो के सामने अस्पृश्यों का पक्ष रखा
Dr. Ambedkar with the teachers and head teachers of the London School of Economics and Political Science.
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस के अध्यापकों प्रधान-अध्यापकों के साथ डॉ. आंबेडकर
भारतीय संविधान समिति कामकाज करते हुए पहली कतार में डॉ आंबेडकर दिखाई दे रहे हैं
निपानी के एक शिल्पकार आर. बी. (बापू) मडीलगेकारका जुलाई – अगस्त 1950 के दरमियान बनाया हुआ डॉ आंबेडकर का अर्ध पुतला निपानी के अपने सहयोगी बी एच वराले के अनुरोध पर डॉ अंबेडकर दिल्ली स्थित अपने निवासस्थान पर इस पुतले के लिए समय देने के लिए तैयार हो गए थे
औरंगाबाद स्थित मिलिंद महाविद्यालय की इमारत के सामने खींचा गया छायाचित्र (1 जुलाई 1953) (बाईं ओर से ) आर्किटेक्ट नार्वेकर, प्राचार्य म. भि. चिटणीस, माई आंबेडकर, डॉ. आंबेडकर, रायबहादुर सी. के. बोले, कमलाकांत चित्रे और बी. एच. वराले.
मंत्री पद से त्यागपत्र देने के पश्चात १८ नवंबर १९५१ को डॉ आंबेडकर मुंबई लौट आए उसे समय मुंबई प्रदेश शेड्यूल कास्ट फेडरेशन और समाजवादी पार्टी द्वारा बोरीबंदर रेलवे स्टेशन पर आयोजित उनके स्वागत कार्यक्रम का एक हंसमुख क्षण. राय बहादुर जी के बैठने के लिए जगह न होने के कारण डॉ आंबेडकर ने उन्हें अपनी गोद में बैठा लिया है साथ में माई अंबेडकर
धम्मचक्र प्रवर्तन का यह क्रांतिकारी कार्यक्रम संपन्न होने के पश्चात भारतीय बौद्धजन समिति (नागपुर शाखा) के सामुदायिक धर्मांतर व्यवस्थापक मंडल के पदाधिकारी के साथ श्याम होटल में खींचा गया डॉ आंबेडकर का छायाचित्र
पुणे के नजदीक भीमा नदी के किनारे स्थित भीमा कोरेगांव विजयस्तंभ का डॉ आंबेडकर ने अपने सहयोगियों के साथ 1 जनवरी 1927 को दौरा किया. 1818 में ब्रिटिश व पेशवाओं में हुई निर्णायक लड़ाई में पेशवाओं का पराभव हुआ व पेशवाई नष्ट हो गई. ब्रिटिशों की ओर से लड़वाने वाले सैनिक प्रमुख रूप से महार थे उनके शौर्य के प्रतीक के रूप मे यह विजयस्तंभ ब्रिटिशों ने बनवाया था
छायाचित्र में डॉ अंबेडकर के साथ (बायीं ओर से) एस. एस. बराथे  बी. जे भोंसले, एस बी  भंडारे, जे एस रणपीसे, डॉ पी.जी सोलंकी, शिवराम जनबा कांबले, के एन सोनवाड़े, व रामचंद्र कृष्णजी कदम, तो दूसरी पंक्ति में पी. वाघमारे, बी.बी. जाधव, जीवाप्पा लिंगप्पा ऐडाले, एस.आर  थोरात,  के.एन कदम, के.एस कांबले, और  दिखलाई दे रहे हैं यहां हुई आमसभा में दिए भाषण में डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि मेहर एक लड़ाकू और के.एन सोनकंबले दिखलाई दे रहे है. यहां हुई आम सभा में दिए भाषण में डॉ अंबेडकर ने कहा कि महार एक लड़ाकू और बहादुर जमात है


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