एक समय था जब भीड़े वाड़ा, बुधवार पेठ में स्थित, भारत में लड़कियों के लिए पहला स्कूल बनाने का सम्मान प्राप्त था। यह स्कूल 1848 में समाज सुधारक ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले द्वारा स्थापित किया गया था।
लेकिन 13 वर्षों के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, यह ऐतिहासिक स्कूल अब एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में पुनर्विकसित किया जाएगा। किरायेदारों और दुकानदारों द्वारा दायर की गई याचिका को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया और वाड़ा के पुनर्विकास पर लगी रोक को हटा दिया।
अब इस स्थल पर एक शानदार स्मारक का निर्माण होगा, जो सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले की महानता और उनकी समाज में महिला शिक्षा के प्रति समर्पण को प्रकट करेगा। इस नव-निर्मित स्मारक से आने वाली पीढ़ी को उनके योगदान और संकल्प की प्रेरणा मिलेगी।
पुणे, बुधवार पेठ: लड़कियों के लिए देश की पहली स्कूल – भीड़े वाडा – को 13 सालों के कानूनी विवाद के बाद राष्ट्रीय स्मारक के रूप में पुनर्निर्माण किया जाएगा।
मुख्य बिंदुएँ:
- 🌟 ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले ने 1848 में भीड़े वाडा में आठ छात्रों के साथ स्कूल की शुरुआत की।
- 🏫 1851 तक उन्होंने तीन स्कूल चलाए जिसमें 150 से अधिक छात्र थे।
कानूनी अदालत में निर्णय:
- पुणे नगर निगम की मुख्य कानूनी अधिकारी निशा चव्हाण ने बताया कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सोमवार को किरायेदारों और दुकानदारों की याचिका खारिज की है।
- उन्होंने यह भी जोड़ा कि जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस कमल खाटा ने कहा कि सरकार के पास सड़क और पुल बनाने का पूरा अधिकार है, साथ ही महान व्यक्तियों के नाम पर स्मारक भी बनाने का अधिकार है।
आगे की योजना:
- नासिक में, AIMPSP के प्रमुख और राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने आदेश का स्वागत किया और पत्रकारों को बताया कि एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा।
- भुजबल ने बताया कि किरायेदार ने यह तर्क दिया कि वहां कभी कोई स्कूल मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि वहां कभी ऐसा सबूत नहीं मिला।
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और दो उप-मुख्यमंत्री – अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस – ने परियोजना की मंजूरी दी है।
निष्कर्ष: इस समाचार से यह स्पष्ट है कि भीड़े वाडा के पुनर्निर्माण से ऐतिहासिक स्थल की महत्वपूर्णता को समझा और समर्थन किया जा रहा है। यह भारतीय समाज के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
