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Reading: मैं अस्थाई बदलाव नहीं चाहता (कांशीराम)
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Tathagat LIVE > प्रत्यक्षदर्शी लिखते हैं > मैं अस्थाई बदलाव नहीं चाहता (कांशीराम)
प्रत्यक्षदर्शी लिखते हैं

मैं अस्थाई बदलाव नहीं चाहता (कांशीराम)

IronMan
Last updated: 2023/10/07 at 4:19 PM
IronMan 12 Min Read
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आज जब देश में राष्ट्रवाद पर बहस छिड़ी हुई है कांशीराम जी द्वारा दिए गए राष्ट्रवाद की परिभाषा गौर करने लायक है मान्यवर कांशीराम दो राष्ट्रवाद के सिद्धांत की बात कहते थे एक वह जो सताए जाते हैं उनका राष्ट्रवाद और दूसरे जो सताते हैं उनका राष्ट्रवाद उनका मानना था कि अत्याचार करने और सताने वाले के लिए राष्ट्रवाद की परिभाषा सामंतवाद है जबकि मेरे लिए राष्ट्रवाद भारत की जनता है 8 मार्च 1987 को काशीराम जी द्वारा इलस्ट्रेटिड वीकली के संवाददाता निखिल लक्ष्मण को दिए गए साक्षात्कार के जरिए हम मान्यवर को आपके सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं तकरीबन तीन दशक बाद भी वह इंटरव्यू बहुजन समाज को दिशा देने में सक्षम है

सवाल – आप सभी राजनीतिक दलों के प्रति इतने विरोधी क्यों हैं विशेषकर कम्युनिस्टों के ?
कांशीराम – मेरे विचार में सभी पार्टियां यथास्थिति की पोशाक है हमारे लिए राजनीति है बदलाव की राजनीति। मौजूदा पार्टियां यथास्थिति को बने रहने का कारण है यही कारण है कि पिछड़ी जातियों को आगे बढ़ाने का काम नहीं हुआ है कम्युनिस्ट पार्टियां इस मामले में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हुई है वह परिवर्तन की बात करती है लेकिन काम यथास्थिति के लिए करती हैं बीजेपी बेहतर है कम से कम यह बदलाव की बात कभी नहीं करते इसलिए लोग धोखे में नहीं रहते कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां गरीबी दूर करने की बात करती हैं लेकिन काम करीबी बनाए रखने का करती हैं यदि गरीब गरीब नहीं रहेगा तो यह लोग यथास्थितिवादी गद्दी पर नहीं बैठ पाएंगे

सवाल – आपका कैडर महात्मा गांधी का इतना विरोधी क्यों है ?
कांशीराम – गांधी सभी बुराइयों की जड़ है मैं बदलाव चाहता हूं डॉक्टर अंबेडकर बदलाव चाहते थे लेकिन गांधी यथास्थिति के रखवाले थे वह शूद्र को हमेशा शूद्र बनाए रखना चाहते थे गांधी ने राष्ट्र को बांटने का काम किया लेकिन हम राष्ट्र को संगठित करने का कार्य कर रहे हैं हम सभी बनावटी परिवारों को मिटा देंगे

सवाल – आप जातिवादी संगठन खड़ा करके जातिवाद को कैसे मिटा सकते हैं?
कांशीराम – बीएसपी जातिवादी पार्टी नहीं है यदि हम 6000 जातियों को जोड़ रहे हैं तो हम जातिवादी कैसे हो सकते हैं

सवाल – मुझे लगता है कि उच्च जातियों के लिए आपकी पार्टी के दरवाजे बंद हैं ?
कांशीराम – उच्च जातियां कहती है कि आप हमें शामिल क्यों नहीं करते मैं कहता हूं कि आप सभी पार्टियों का नेतृत्व कर रहे. हैं यदि आप हमारी पार्टी में शामिल होंगे तो आप यहां भी बदलाव रोक देंगे उच्च जातियां हमारी पार्टी में शामिल हो सकती हैं लेकिन वे इसके नेता नहीं हो सकते। नेतृत्व पिछड़ी जातियों की हाथों में ही रहेगा मुझे डर है कि जब उच्च जातियों के लोग हमारी पार्टी में आएंगे तो भी बदलाव की प्रतिक्रिया को रोकेंगे जब यह डर समाप्त हो जाएगा तो भी हमारी पार्टी में शामिल हो सकते हैं

सवाल – जिन राजनीतिज्ञों से हमने दिल्ली में बात की वह कहते हैं कि यदि बीएसपी ने अपना ज्यादा लड़ाकूपन दिखाया तो वे राजनीति में खत्म कर देंगे?
कांशीराम – हम उनको खत्म कर देंगे क्योंकि जब इंदिरा एक चमार के द्वारा खत्म की जा सकती है तब यह क्या बच सकते हैं जब हम सशस्त्र सेनाओं में 90 फ़ीसदी हैं बीएसएफ में 70 फ़ीसदी है 50 फीसदी आरपीएफ और पुलिस में है तो हमारे साथ कौन कर सकता है एक जनरल के लिए जवानों की तुलना में कम गोलियां चलाइए उनके पास जनरल हो सकते हैं जवान नहीं

सवाल – इसका अर्थ है आप हिंसा का प्रचार कर रहे हैं?
कांशीराम – मैं शक्ति का प्रचार कर रहा हूं हिंसा को रोकने के लिए मेरे पास शक्ति होनी चाहिए उदाहरण के लिए मेरे अलावा शिवसेना को कोई नहीं पछाड़ सकता जब कभी मैं महाराष्ट्र आऊंगा मैं उनको खत्म कर दूंगा शिवसेना की हिंसा खत्म हो जाएगी

सवाल – आप ऐसा किस प्रकार करेंगे?
कांशीराम – शिवसेना में कौन लोग हैं जो आग लगाते हैं और तोड़फोड़ करते हैं वे चार जातियां हैं अगाडी ,भण्डारी ,कोली और चमार यह अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग हैं जब मैं महाराष्ट्र आऊंगा यह लोग मेरे पास आ जाएंगे

सवाल – आप कैसे मानते हैं कि यूपी में बीएसपी का हश्र RPI की शासक पार्टियों के साथ सौदेबाजी की ताकत की तरह खात्मा नहीं होगा?
कांशीराम – RPI में कभी सौदेबाजी नहीं की यह तो मांगने वाली पार्टी थी यह सौदेबाजी करने के स्तर तक कभी नहीं पहुंची मुझे याद है 1971 के आम चुनाव में 521 सीटों के लिए चुनावी समझौता हुआ जिसमें 520 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ी तथा बाकी -एक पर आरपीएफ मुझे आरपीएफ प्यारी है लेकिन इससे तुलना करने में मुझे घृणा है यह एक ऐसी वैश्या है जो कौड़ियों में बिकती है जब तक मैं जिंदा हूं ऐसा बीएसपी के साथ कभी नहीं होगा हम बदलाव चाहते हैं हम यथास्थिति वाली ताकतों से गठजोड़ नहीं चाहते यदि सरकार हमारे सहयोग के बगैर नहीं बन सकती तो बदला कि हमारी अपनी शर्ते होंगी हम आधारभूत तथा ढांचागत बदलाव चाहते हैं बनावटी नहीं

सवाल – आपके फंड के स्त्रोत के पीछे कुछ रहस्य हैं?
कांशीराम – मेरे पास फंड विभिन्न स्त्रोतों से आते हैं जो कभी खत्म नहीं होंगे मेरा फंड ऐसे लोगों से आता है जो दौलत पैदा करते हैं बहुजन समाज दौलत पैदा करता है मैं उन्हीं से पैसा लेता हूं लाखों लोग त्योहारों जैसे कुंभ मेला इत्यादि पर करोड़ों रुपए खर्च करते हैं केवल अगला जन्म संवारने के लिए कांशीराम उनको बताता है कि मैं अगले जन्म के बारे में कुछ नहीं जानता लेकिन मैं वर्तमान जीवन का विशेषज्ञ हूं मैं कहता हूं जिनको अगला जन्म सवारना है वह गंगा किनारे ब्राह्मणों के पास जाओ जिनको वर्तमान जीवन सुधारने में रुचि है वह मेरे पास आए इसलिए वह मेरी मीटिंगों के लिए दौड़ते हैं

सवाल – वे कहते हैं कि आपने लखनऊ रैली पर बहुत पैसा खर्च किया है?
कांशीराम
– केवल बसों को किराए पर लेने के लिए ही २२ लाख खर्च किए गए लेकिन मैं नाराज हूं यह 22 करोड़ होने चाहिए थे एक समय आएगा जब मेरे आह्वान पर 22 करोड तक लोग खर्च करेंगे मेरे लिए पैसों की कोई कमी नहीं है यदि खजाने से पैसा आता तो यह खाली हो जाता मैं लगातार चलने वाले स्त्रोत से पैसा ले रहा हूं मुझे सभी 542 लोकसभा सीटों को जीतने के लिए केवल 1करोड़ रुपया चाहिए 1 दिन वोटर काशीराम को पैसा देने के लिए लाइन में खड़े होंगे अगले दिन वे काशीराम को वोट देने के लिए लाइन लगाएंगे

सवाल – आपकी पार्टी से कुछ लोग पार्टी छोड़ कर चले गए?
कांशीराम
– आप सभी लोगों को एक साथ नहीं रख सकते कुछ लोग थक सकते हैं कुछ को खरीदा जा सकता है कुछ डर सकते हैं ऐसा लगातार चलता रहेगा इससे हम हतोत्साहित नहीं होंगे मैंने एक ऐसा तरीका इजाद किया है कि यदि किसी समय पर 10 आदमी छोड़कर जाते हैं तो हम उसी स्तर के 110 लोग तैयार कर लेंगे जिनको हमने डेडवुड (मृत काठ) करके अलग किया है उसी (मृत काठ) को दूसरे जलाकर कुछ आग पैदा कर रहे हैं वह उनको हमारे विरोध प्रयोग करने की कोशिश कर रहे हैं

सवाल – आप किस प्रकार के बदलाव की ओर देख रहे हैं?
कांशीराम
– में अस्थाई बदलाव नहीं चाहता मैं ऐसा कुछ नहीं चाहता जो टिकाऊ ना हो हम जो कर सकते हैं करेंगे लेकिन यह बरकरार रहना चाहिए और स्थाई बदलाव के द्वारा बरकरार रहना चाहि

TAGGED: यूपी, खत्मा, गांधी, फंड, कम्युनिस्टों, कांशीराम, राष्ट्रवाद, बदलाव, बीएसपी, देश, हिंसा, लखनऊ, पार्टी, जातिवाद, टिकाऊ
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2 Comments 2 Comments
  • Realistic Narendra says:
    October 7, 2023 at 3:04 am

    Sir krantikari Jai bhim Namo buddhay Jai Johar 🙏🙏🙏🙏🙏 मान्यवर साहब के विचार बहुत ही क्रांतिकारी परिवर्तन लाने जैसा है यदि साहब अभी तक होते तो हम सभी सम्राटों कि दुनिया बहुत आगे बढ़ रही होती !!!!

    Reply
  • Vinay ingole says:
    October 7, 2023 at 9:22 am

    Literally boss …aap ekdm kamal ki jankari dete ho hamesha…. please aap yesehi dete rahe bahujan bete betiya padh rahe he….jai bheem

    Reply

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