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डॉ आंबेडकर स्वयं कहते थे कि हमारे परिवार के लोग पहले अम्बावडेकर नाम से पहचाने जाते थे बाद में अम्बावडेकर नाम का रूपरांत आंबेडकर कैसे हुआ इस बात का इतिहास एक बार उन्होंने स्वयं बताया था
यह संस्मरण स्वयं डॉ आंबेडकर अपनी कलम से लिखा था:
हमारा सरनेम आंबेडकर नहीं था हमारा सही सरनेम था अम्बावडेकर तहसील दापोली के पास पांच मील की दूरी पर अम्बावडे नाम का एक छोटा सा गांव है उसके कारण लोग हमको अम्बावडेकर के नाम से ही जानते थे। इस अम्बावडेकर सरनेम का आंबडेकर नाम कैसे हुआ इसका भी एक दिलचस्प इतिहास है।

हमको पढ़ाने वाले आंबडेकर नाम के एक ब्राह्मण मास्टर थे वह हमको कुछ विशेष पढ़ते नहीं थे । लेकिन मुझ पर उनका बड़ा प्यार था बीच की छुट्टी में मुझे भोजन करने के लिए पाठशाला से दूर अपने घर जाना पड़ता था यह बात आंबडेकर मास्टर जी को पसंद नहीं थी किंतु उतना ही समय मुझे बाहर घूमने की छूट मिल जाती थी इसलिए मुझे भी रोटी के लिए बीच की छुट्टी में घर जाने में बहुत मजा आता था लेकिन हमारे मास्टर ने एक तरकीब खोज निकाली वह अपने साथ रोटी सब्जी बांधकर लाते थे । वह हर दिन बीच की छुट्टी में मुझे कभी ना भूलते हुए बुलाते थे और अपने भोजन में से रोटी सब्जी मुझे खाने के लिए देते थे । लेकिन स्पर्श न हो जाए इस बात का ध्यान वह भी रखते थे । वह अपनी रोटी ऊपर से मेरे हाथों पर डालते थे मुझे यह कहने में बड़ा गर्व होता है कि प्रेम से दी गई हुई उसे रोटी सब्जी की मधुरता कुछ और ही थी । जब मुझे इस बात की याद आती है तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं सचमुच आंबडेकर मास्टर मुझ पर बड़ा प्रेम था । एक दिन उन्होंने ही मुझसे कहा था कि तेरा यह अम्बावडेकर सरनेम बेढंगा सा लगता है उसे तो मेरा यह आंबडेकर नाम अच्छा है आगे से इसी नाम को लगाना और उन्होंने कैटलॉग में इस प्रकार नाम लिख भी डाला….
जिस तरह उनके सरनेम का रूपांतरण हुआ उसी प्रकार उनके (डॉ आंबडेकर) के व्यक्तिगत नाम का भी समय-समय पर रूपांतरण हुआ है स्कूल, हाई स्कूल और कॉलेज के कैटलॉग में उनके (डॉ अंबेडकर) के बारे में जो लिखा गया है उसके बारे में जानकारी भेजने के लिए मैंने उस स्कूल के अधिकारियों से निवेदन किया तब अधिकारियों ने मुझे निम्न प्रकार से जानकारी भेजी है वह जानकारी निम्न प्रकार से हैं
| स्कूल | कैंप स्कूल सतारा | हाई स्कूल सतारा | अल्फिल्टन कॉलेज |
| 1. नाम | भीवा रामजी आंबेडकर | भीवा रावजी आंबेडकर | भीवराव रामजी आंबेडकर |
| 2 . रजिस्टर नम्बर | – | 1914 | 48 |
| 3 . जन्मतिथि | – | 14.04.1891 | 14.04.1891 |
| 4 . प्रवेश तिथि | – | 07.11.1900 | 03.01.1908 |
| 5 . किस कक्षा में दर्ज | – | पहली | प्रीवियस |
| 6 . स्कूल छोड़ने की तिथि | – | नवंबर 1904 | जनवरी 1913 |
| 7 . गांव | सातारा | सातारा | सातारा |
सन 1908 और 1912 के मुंबई यूनिवर्सिटी के जो कैलेंडर पहला भाग है उसमें जो नाम मिलता है वह आंबडेकर भीवराम रामजी।
सन 1912 के कैलेंडर में (भाग पहला) सीनियर बी.ए की कक्षा के छात्रों के नाम दिए गए हैं उनमें 871 वे क्रमांक डॉ आंबेडकर का जो नाम है वह आंबेडकर भीमराव रामजी है।
सन 1914 के कैलेंडर में (भाग पहला) 1913 साल में हुई बी.ए की परीक्षा का परिणाम दिया गया है उसमें पृष्ठ 405 पर डॉ आंबेडकर का नाम दिया गया है वह आंबेडकर भीवराव रामजी है इस प्रकार उनके नाम का भी एक इतिहास है।
आंबेडकर मास्टर जी के स्कूल में विशेष नहीं पढ़ते थे। इसलिए बच्चों को घर के लिए अभ्यास का काम नहीं मिलता था। भीवा का सारा समय घूमने और झगड़ा करने में बर्बाद हो जाता था। आंबेडकर मास्टर जी ने हम लोगों को बचपन में पढ़ाई करने के उचित संस्कार दिए नहीं इस प्रकार की शिकायत डॉ आंबेडकर ने कभी नहीं की बल्कि वे कहते थे कि आंबेडकर मास्टर जी ने मेरे साथ बड़ा अच्छा बर्ताव किया आंबेडकर मास्टर उनके पहले शिक्षक थे उनके बारे में डॉ आंबेडकर बड़े सम्मान के साथ कहते थे कि-
जब मैं राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के लिए लंदन जाने के लिए निकला था तब उन्होंने मुझ प्यार भरा पत्र लिखा उसे पत्र को मैं संभाल कर रखा हुआ है आगे जब भी मुझे मेरी आत्मकथा लिखने की प्रेरणा होगी तो उसे पत्र को मैं उसमें छापने वाला हूं |
आंबेडकर मास्टर डॉ आंबेडकर से मिलने के लिए सन 1927 में आए थे उस समय उनका कार्यालय दामोदर हॉल के पीछे वाले स्कूल के भवन में नीचे की मंजिल पर था मास्टर जी के कार्यालय में प्रवेश करते ही उनको देखकर डॉ आंबेडकर नीचे झुककर नमस्कार किया मास्टर जी ने भी अपनी आंखें पहुंचते हुए अपने बहादुर छात्रों को आयुष्मान हो कर आशीर्वाद दिया। यह मैंने अपनी आंखों से देखा है। आंबेडकर मास्टर जी डॉ आंबेडकर की भव्य लाइब्रेरी देखकर गर्दन हिला रहे थे डॉ आंबेडकर ने आंबेडकर मास्टर जी के लिए नए कपड़े सिलवाए और उनका उचित सम्मान भी किया।
Ref – चांगदेव भवानराव खैरमोडे वॉल्यूम Page- 54,55,56,59

Hi
Jai bheem 💙💙💙