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दूसरे दिन यानी 16 अक्टूबर को सुबह डॉ बाबासाहेब आंबेडकर श्याम होटल से चंद्रपुर जाने के लिए निकले उसे समय चंद्रपुर जाने के लिए पांचो भिक्कु और वलिसिंह भी तैयारी करने लगे थे । डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के ध्यान में यह आया तो उन्होंने मुझे कहा “Go and tell them they are not required these” (जाओ उन्हें कह दो उनकी कहीं कोई जरूरत नहीं है) मैं स्वयं वहां के लोगों को दीक्षा दूंगा ।

फिर भी वे पांचो भिक्कु चंद्रपुर गए बैरिस्टर खोब्रागडे उन्हें कार से ले गए । डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने चंद्रपुर से दूसरे दिन मुझे तार किया कि मैं दो-चार दिन नागपुर में उसी होटल में रुकूंगा मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी है व्यवस्था करो ।
मैंने श्याम होटल के मालिक से बात की और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के निवास की व्यवस्था की दूसरे दिन यानी 18 अक्टूबर को बाबासाहेब दक्षिण एक्सप्रेस द्वारा चंद्रपुर से नागपुर आए तब मैं उनसे मिलने के लिए स्टेशन पर गया बाबासाहेब ने कहा अरे मैं आज ही रत्तू से पूछा था कि उसने कितने दिन की छुट्टी ली है तो उसने कहा कि वह अवकाश लेकर नहीं आया आपने कहा था चलो तो मैं आ गया । वह सर्विस वाला है इसलिए मैं आज नहीं रहूंगा मैं आज ही फ्लाइट से दिल्ली चला जाऊंगा मैं जो फोटो (गुलाब नागदेवे ने भेंट में दिए वह) अपने साथ ले जाने वाला था । वह तुम अपने ऑफिस में रखना अब मैं सीधे हवाई अड्डे जा रहा हूं ।
मैं डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को लाने के लिए स्टेशन पर कार ले गया था उसी कार से बाबासाहेब, माईसाहेब और रत्तू एयरपोर्ट जाने के लिए निकले इस समय बाबासाहेब ने कार में मुझसे कहा था । “मैं जैसे ही दिल्ली पहुँचूँगा सबसे पहले रत्तू को ऑफिस में छोड़ दूंगा । फिर मैं अपने घर जाऊंगा” ।
हमारे पीछे एक टैक्सी मां प्रह्लाल मेढे और कर्नल बाग के कुछ कार्यकर्ता थे । दिल्ली जाने वाला हवाई जहाज दोपहर 1:00 का था ।
सोनेगांव हवाई अड्डे पर डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को इंजेक्शन लेना था । उन्हें कोलन वाटर की जरूरत थी इसे लाने के लिए प्रह्लाल मेढे और राम फुलझेले टैक्सी से बर्डी आए । मॉडर्न ड्रग से कोलन वाटर की बोतल लेकर वे शीघ्र हवाई अड्डे पर आए बाबासाहेब ने इंजेक्शन लेने के बाद हवाई अड्डे पर ही भोजन किया (मॉडर्न ड्रग एजेंसी का बिल मेढे ने संभाल कर रखा है)
यहां भी कुछ पत्रकार ने बाबासाहेब से आगे होने वाले धम्मदीक्षा कार्यक्रम के बारे में पूछा समय होते ही होने व्हीलचेयर पर बैठाकर हवाई जहाज तक लेकर आए इस समय बाबासाहेब के हाथ में दीक्षा के समय की काठी थी बाबासाहेब विमान में बैठे तब आकर अधिकारियों ने वह काठी ले ली दोपहर 1:30 बजे बाबासाहेब, माईसाहेब, रत्तू जहाज से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए ।
कुछ देर बाद बाबासाहेब की वह काठी विमानतल के अधिकारियों से मेढे के कार्यकर्ताओं ने प्राप्त कर ली कैसी हमरी – तुमरी अधिकारियों से हुई यह तो मेढे से सुन सकते हो वह काठी तब से मेढे के पास है आज भी लोग उस काठी के दर्शन करने के लिए मेढे के यहां आते हैं ।
