कपूर सिंह प्रोफेसर खालसा कॉलेज बंबई लिखते हैं-

मैं भी कुछ अपने साथियों के साथ लाहौर रेलवे स्टेशन पर साइमन कमीशन बायकाट देखने गया था.
वहां पर 100 आदमी मौजूद थे।
मैं लाला लाजपत राय और पंडित मदन मोहन मालवीय के पास खड़ा हो गया।
लाला लाजपत राय छाता ताने खड़े थे उसी समय डी.आई.जी पुलिस मिस्टर हैमिल्टन हर्डिग ने हवा में अपनी छड़ी घुमाई थी, जो की लाला लाजपत राय के खुले हुए छाती पर लगी थी.
कोई लाठी चार्ज नहीं हुआ था लाला लाजपत राय ने सीनियर पुलिस अफसर मिस्टर स्काट से अपनी पुरानी निजी दुश्मनी का बदला लेने के लिए एक कहानी बना डाली की मिस्टर स्कॉट ने मुझे लाठियां मारी हैं।
सच्चाई यह है कि लाला लाजपत राय ने अमेरिका में रहने वाले सिखों के 70,000 रुपए हड़प लिए थे, उन सिखों के कहने पर मास्टर तारा सिंह ने लाला लाजपत राय को कानूनी नोटिस दे दिया था
लाला लाजपत राय पर भ्रष्टाचार का दोष था.
यह नोटिस लाला लाजपत राय को घुन की तरह खाए जा रहा था मुकदमे और बदनामी के भय के कारण उनको दिल का दौरा पड़ा और देहांत हो गया
परंतु कांग्रेसी डॉक्टरों ने सर्टिफिकेट दे दिया कि लाला लाजपत राय की मौत चोट के कारण हुई है.
जबकि लाला लाजपत राय की मौत लाठियों से नहीं बल्कि मानसिक आघात के कारण हुई थी।
संदर्भ- पूनापैक्ट
लेखक – बी.आर. सांपला
पेज – 28-29
