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शनिवार 13 अक्टूबर 1956 को शाम 5:00 बजे,
डॉ. आंबेडकर ने संवाददाताओं का श्याम होटल में ही सम्मेलन आयोजित किया प्रारंभ में बाबा साहेब ने धर्मांतरण के स्वरूप एक बारे में बताते हुए कहा ” बुद्ध के उपदेश में निहित धाम दर्शन को अपने जीवन में स्वीकार कर मैं आजीवन पालन करूंगा |हीनयान और महायान में व्याप्त मतभेद से मैं और मेरे अनुयायी दूर रहेंगे इसकी मैं दक्षता लूंगा मेरा बौद्ध धर्म ही हीनयान और महायान इन दो संप्रदायों से बिल्कुल भिन्न है आप उसे (नवयान) कह सकते हैं मैंने गांधी जी को यह आश्वासन दिया था कि मैं काम से कम हानिकारक मार्ग को अपनाऊंगा|तदनुसार में अब बौद्ध धर्म को स्वीकार कर हिंदू समाज पर एक तरह से उपकार ही कर रहा हूं क्योंकि बौद्ध धर्म भारतीय संस्कृति का ही एक अंग है |

पत्रकार- आप हिंदू धर्म क्यों छोड़ रहे हैं ?
डॉ. आंबेडकर ने उत्तर दिया– “यह सवाल आप स्वयं से क्यों नहीं पूछते? यह सवाल आप अपने बाप दादाओ से पूछे वही इसका उत्तर देंगे आप हिंदू लोग क्या यही पूछने यहां आए हैं? इसके पहले कहां छुप गए थे आप लोगों ने पूरी जिंदगी मेरा अपमान किया है ? और अब पूछ रहे हैं कि हिंदू धर्म क्यों छोड़ रहा हूं आप हिन्दुओं ने मुझे सदैव खड्डे में गिराया है अभी भी मैं मारा नहीं जिंदा हूं मैं बौद्धधर्म का प्रसार पूरे भारत में करूंगा।

पत्रकार– धर्मात्तर के कारण संविधान द्वारा पदत्त विशेष सुविधाओं से अब अस्पृश्य वंचित हो जाएंगे उसके बारे में आप क्या कहना चाहते हैं ?
डॉ. आंबेडकर– “सर्वसामान्य नागरिकों के लिए जो व्यवस्थाएं संविधान में हैं वह हमें भी धर्मांतरण के बाद ही मिलेगी लेकिन विशेष सुविधा के बारे में क्यों प्रश्न पूछ रहे हैं उनकी चिंता क्यों कर रहे हैं संविधान द्वारा पदत्त सुविधाओं के कारण हम सदैव अस्पृश्य बने रहे क्या आप यह चाहते हैं हम मानवीय हक चाहते हैं संविधान द्वारा दी गई सुविधाओं को भी हम प्राप्त करेंगे इसके पहले भी हमने संयुक्त मतदाता संघ क्षेत्र की मांग की थी तब गांधीजी ने विरोध किया था । अब क्यों सुविधाओं का मुद्दा आगे लाया जा रहा है बौद्धधर्म स्वीकार करने में मेरे राजनीतिक अधिकार आड़े नहीं आएंगे आज जो स्वतंत्र मतदाता संघ है उनकी अवस्था क्या है सभी सीटें तो कांग्रेस के पास है जो अस्पृश्य है सुरक्षित सीट पर चुनकर गए हैं (कांग्रेस की टिकट पर) उन्होंने अछूतों के हित के लिए कौन सा कार्य किया है ऐसी सीटे लेकर क्या करना है।
पत्रकार- आपने धर्मांतरण का निर्णय क्यों लिया ?
डॉ. आंबेडकर– सदियों से स्वर्ण हिंदुओं ने विशेषत: ब्राह्मणों ने हमारे साथ सौतेला व्यवहार किया जिसकी नाक से यदि कोई दुर्गंध आ रही हो तो वह भी अब बौद्ध बनेगा। बौद्धधर्म विश्वधर्म है। पूरे भारत में हमें धर्म परिवर्तन करना है बुद्ध ने यह कभी नहीं कहा कि मैं कहता हूं, इसलिए तुम सब मान लो। मैंने जो बताया है वह यदि समय से विसंगत है तो उसमें परिवर्तन करो ऐसा कहकर उन्होंने हमें स्वतंत्रता दी है पहले लोगों में विचार क्रांति करनी पड़ती है तब आचार क्रांति होती है
पत्रकार- विचार और अचार में कोई फर्क रहेगा क्या?
डॉ. आंबेडकर– “फर्क तो पड़ता ही है लेकिन धर्म की शिक्षा भी समाज को देनी जरूरी हो जाती है।
पत्रकार- एक जातिभेद के अलावा आप बौद्ध और हिंदू धर्म में कौन सा अंतर बता सकते हैं ?
डॉ. आंबेडकर– “प्राण निकल जाए तो शरीर में क्या शेष रहेगा इस तरह का यह प्रश्न है यह जातिभेद तो आप मानते हैं ना जातिभेद किसने बढ़ाया ब्राह्मणों ने हमें और मराठों को कभी विचार की स्वतंत्रता नहीं दी
पत्रकार- अस्पृश्य वर्ग में भी जाति भेद है बौद्ध धर्म स्वीकार करने के बाद क्या यह खत्म हो जाएगा ?
डॉ. आंबेडकर– “यह तो हमने आपसे लिया है” फिर भी हम उसे रोक सकते हैं| मैं शूर और निडर हूं लोगों को कैसे रहना चाहिए यह बताऊंगा वरना मैं अकेला ही बुद्ध हो जाऊंगा इसमें क्या बुराई है मेरा सवाल यह है कि बुद्धकालीन ब्राह्मणों ने बौद्धधर्म स्वीकार क्यों किया था उन्हें तब समझ में आया था तो अब क्यों नहीं आ रहा है यह सवाल मैं अपने सार्वजनिक भाषण में करने वाला हूं |
पत्रकार- धर्मांतरण के बाद शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का क्या होगा?
डॉ. आंबेडकर शायद वह दल रहेगा या नया दल बनेगा मैं बौद्धधर्म में प्रवेश कर लूंगा तब शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का सदस्य नहीं रहूंगा
पत्रकार- बौद्धधर्म स्वीकार करने के बाद आप क्या करेंगे?
डॉ. आंबेडकर– मैं मिशनरी बन जाऊंगा लेकिन राजनीति से सन्यास नहीं लूंगा चुनाव में खड़ा रहूंगा ।
पत्रकार- रिपब्लिकन पार्टी स्थापित करने की योजना क्या है ?
डॉ. आंबेडकर– निश्चित योजना है उस दल का संविधान भी बनाया है उसके प्रिय बल में स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व इन तीन सिद्धांतों पर यह पार्टी आधारित रहेगी| यह स्पष्ट किया गया है पार्लियामेंट में आने वाले हर एक बिल को इन तीनों कसौटियों पर करना जाएगा
पत्रकार- इस पार्टी का दर्शन क्या है?
डॉ. आंबेडकर– पार्टी के लिए आवश्यक है उसका फौलादी नेता |
पत्रकार- इस पार्टी का स्वरूप व्यापक रहेगा?
डॉ. आंबेडकर:- आज पार्टी में सभी को प्रवेश दिया जाएगा |
पत्रकार- द्विभाषि राज्य के बारे में आपका मत क्या है? द्विभाषि राज्य के बारे में आपका मत क्या है क्या यह बना रहेगा?
डॉ. आंबेडकर– इसे तोड़ना मेरा पहला कर्तव्य है जो संस्कृति सीमा भारत में स्वाभाविक रूप से तैयार हो गई है उसे हम बदल नहीं सकते |
