डॉ. वामनराव गोडबोले की किताब से Buy Now

15 अक्टूबर को सुबह बाबा साहब से मिलने के लिए गया तो बारामदे में सभी राजनीतिक नेता एक साथ हो गए बाबा साहब ने मुझे ( वामनराव गोडबोले ) कहा अरे रात को तुम कहां गए मैंने रात को ही तुम्हें बुलावा भेजा था ऑफिस में भी कॉल बेल बजाई थी तुम आये नहीं लोग कहते हैं कि तुम नागपुर छोड़कर चले गए हो।
मैंने कहा ( वामनराव गोडबोले )- “बाबासाहेब को छोड़कर मैं कैसे जा सकता हूं रात को दीक्षाभूमि में नाटक के बाद बहुत से कार्य शेष थे | रात को मैं वही सोया था, इसलिए लोगों ने अफवाह फैलाई होगी “अच्छा ठीक है” आगे उन्होंने कहा- अरे मैं कल बौद्ध हो गया हूं जिन लोगों ने दीक्षा ली है, उनकी एंट्री रजिस्टर में हो गई है लेकिन मेरी नहीं हुई“।
बाबासाहेब यह बात तो मेरे मन में भी थी आपके द्वारा 14 अक्टूबर को दीक्षा लेने के बाद ही यह प्रश्न मेरे मन में आया था पर आपसे ऐसा कहना कि बाबासाहेब रजिस्टर में एंट्री कर दो ऐसे कहने की मेरी हिम्मत नहीं हो पाई उसे रजिस्टर में पहले नंबर का पेज जानबूझकर आपके लिए छोड़ा है। नंबर एक रजिस्टर में नंबर एक पर आपका नाम की एंट्री होनी चाहिए “
तो फिर लेकर आओ वह रजिस्टर” बाबासाहेब ने कहा।
मैं तत्काल रजिस्टर लेकर आया । तब बाबासाहेब बोले लिखो मेरा नाम मैंने क्रमांक एक पर नाम जाति, उम्र, पता, आदि के कॉलम बनाए थे । उसमें यह सब लिख लिया । फिर बाबासाहेब ने लिखा कि मैं स्वखुशी से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली है । फिर नीचे हस्ताक्षर किए फिर माईसाहब ने लिखने को कहा । उन्होंने भी हस्ताक्षर किए | फिर आवले बाबू ने पूछा- “मेरा नाम भी लिखा”। तब मैंने कहा “बाबूजी मुझे और भी काम है । आप अपना नाम ,पता लिखें और खुद हस्ताक्षर करें कोई बड़ी बात नहीं है ।
आवले बाबू ने मेरे सामने ही रजिस्टर में अपना नाम, पता लिखा और हस्ताक्षर किए । बाद में वह वहां उपस्थित लोगों ने भी अपना नाम, पता लिखकर हस्ताक्षर किए, लेकिन जिन्हें चुनाव में खड़ा रहना था वे वहां से बिना हस्ताक्षर किए खिसक गए । मैं पंजाबराव संभरकर को देखा । शेष कौन गए याद नहीं ।
जब अन्य लोग रजिस्टर में अपना नाम लिख रहे थे तब मैं बाबासाहेब से कहा- “बाबासाहेब, अपनी दीक्षा विधि में थोड़ी गलती हुई है”।
“क्या, गलती हुई है ? उन्होंने आश्चर्यचकित होकर पूछा ।
मैंने कहा बाबासाहेब हैं मैंने देखा है कि अपने रजिस्टर के रिकॉर्ड के अनुसार कई क्रिश्चियन, और मुस्लिम भी बौद्ध बने हैं । पहले वह अपने ही समाज के थे । ऐसे लोगों ने जत्थे में दीक्षा ली कइयों ने रजिस्टर में अपना नाम पूर्व का धर्म क्रिश्चियन या मुस्लिम लिखा है | तब उन्हें अपनी 22 प्रतिज्ञाओं में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, को नहीं मानूंगा इससे कोई लेना-देना नहीं है । इसके स्थान पर मैं यीशु या मोहम्मद पैगंबर ऐसा आना चाहिए था । ईसाइयों, मुसलमानों को देवी देवताओं से क्या लेना देना है । “बिल्कुल ठीक कहा तुमने बाबासाहेब ने कहा यह बात तो मेरे ध्यान में आई ही नहीं थी । मुझे लगा कि अपने ही लोग दीक्षा लेंगे, लेकिन ईसाई, और मुसलमान भी दीक्षा लेंगे इसकी तो मैं कल्पना ही नहीं की थी । यह अच्छा हुआ आप हमें उन प्रतिज्ञयों में थोड़ा परिवर्तन करना पड़ेगा ।

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